About Me

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Now I take the floor
Outside hardens the core
As I start to grow
I see the long way to go

Tuesday, May 3, 2016

Shayaris Once Again

रूपा के है आशिक़ हज़ार
सभ करते है उससे इतना प्यार
मिलने को बहाना ढूँढ़ते है बार बार
अटेंशन के लिए है सभ बेकरार
एक इशारे के लिए इंतज़ार कर रहे है एक दम तैयार

रात को चमकते है एक दम सही
दाग है पर बदसूरत नहीं

कोई भी तुम्हे नज़र न लगाए
कोशिश रहे न किसी तुम्हें अपना बनाए
तुम्हारी खूबसूरती हर तरफ छान जाए
रुकी अफसर में भी फिर से जान आये

1 comment:

Anonymous said...

Tumhari hindi din-ba-din behthar hothi jaa rahi hai.
Shaayari likhna khaayam rakho. Dil ki baat likhney mein
jo maza hai, woh bahut kamm cheezon mein milthi hai.

-ThodaSaPaagal